आई नोट , भाग 26
अध्याय-4
इंटरनल हैप्पीनेस
भाग-5
★★★
दिन के 12:00 बज रहे थे जब आशीष ने अपनी कार एक ऑफिस के सामने लाकर रोकी। आशीष ने कार के स्टेरिंग पर अपनी उंगलियों को नचाया और ऑफिस की तरफ देखा।
ऑफिस की तरफ देखते हुए उसने अपने मन में कहा “तो यह है तुम्हारे पति को ऑफिस। देखने पर ऐसा लगता है कि इस ऑफिस की कीमत दो करोड़ से ज्यादा नहीं होगी। अगर इसका शेयर मार्केटिंग में हिस्सा है, वैसे इस तरह के ऑफिस का शेयर मार्केट में हिस्सा हो भी कैसे सकता है। इनकी इतनी तो पहुंची ही नहीं होगी।”
उसने अपना फोन निकाला और उस पर ऑफिस के नाम को लिखकर उसके हिस्ट्री निकाली। “तो तुम्हारे पति के ऑफिस की स्थापना 15 साल पहले हुई। एक छोटा सा पब्लिकेशन हाउस जिसमें वर्तमान में 30 राइटर काम करते हैं। तुम्हारे पति का नाम मुझे नहीं पता तो मैं नहीं बता सकता वह कौन से नंबर पर है। इसमें से 20 राइटरों की किताब आ चुकी है, जबकि बाकी के 10 राइटर अभी अपने आर्टिकल में हाथ आजमा रहे हैं। अगर तुम्हारे पति की किताब भी आ चुकी होगी तो मुझे नहीं लगता वो इतना फेमस राइटर होगा कि उसे दुनिया में 20 लोग भी जानते हो। किताबें लिखने के बाद भी लेखक को कौन सा कुछ मिलता है। हम जैसे बिजनेसमेन जितना एक दिन में कमाते हैं, लेखक वह जिंदगी भर नहीं कमा सकता। मुझे तो यही समझ में नहीं आता कि वह कहानियों में अपना दिमाग क्यों खराब करते हैं।” उसने कार का गियर बदला और उसे बैक करते हुए अपने ओफिस की ओर जाने लगा।
आशीष ने कार को सड़क पर चलाते हुए कहा “मानवी, मुझे नहीं लगता तुम एक टफ कम्पिटीटर हो। तुम्हें हासिल करना मुश्किल नहीं रहने वाला। अगर मैं हारुगां तो सिर्फ और सिर्फ अपनी गलतियों की वजह से हारूगां। जो कि मुझे नहीं लगता मैं इस बार करने वाला हूं। मैंने अपनी पिछली गलतियों से यही सीखा है कि इंसान को कभी भी एक बार की गई गलती दोबारा नहीं करनी चाहिए। तुम्हारे लिए किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं बरती जाएगी। तुम्हें हासिल करने के लिए सबसे पहले मैं अपने बिजनेस मैन वाले रुतबे का इस्तेमाल करूंगा, तुम्हें इस बात का एहसास दिलाऊंगा कि मुझमें और तुम्हारे पति में क्या अंतर है। जब तुम देखोगी मैं तुम्हारे पति से कई गुना ज्यादा बेस्ट, कई गुना ज्यादा खुबिया रखने वाला, और उससे काफी ज्यादा अमीर हूं तो तुम्हें इस बात का एहसास होगा कि मैं तुम्हारी जिंदगी में क्यों नहीं। तुम अपनी फटी हालत वाली जिंदगी पर अफसोस जताओगी। खुद को इस बात के लिए कोसोगी कि मैं तुम्हारी जिंदगी में क्यों नहीं आया। फिर इसके बाद तुम अपने आप अपने पति को कह दोगी कि मुझे उसके साथ नहीं रहना। तुम्हें तुम्हारे लिए एक बेस्ट ऑप्शन मिल गया है, जो तुम्हें जिंदगी भर की खुशियां देगा, जो तुम्हें तुम्हारे पति से भी ज्यादा प्यार करेगा, जो तुम्हारी हर एक ख्वाहिश पूरी करेगा।”
उसने सोचना बंद किया और सिर्फ और सिर्फ कार चलाने पर ध्यान दिया। तकरीबन 1 घंटे के सफर के बाद वह ऑफिस पहुंचा। उसने ग्राउंड फ्लोर में अपनी कार खड़ी की, कपड़े बदले और लिफ्ट में आ गया।
जब लिफ्ट ऊपर जाने लगी तब उसने अपने मन में कहा “तो क्या किया जाए, क्या गेम शुरू किया जाए, शायद हां। वैसे भी तुम जानती हो मेरे पिता मेरी शादी के लिए लड़की ढूंढ रहे हैं, अब इससे पहले वहां मामला सेट हो मैं तुम्हें अपने लिए पसंद कर तुम्हें अपने लिए सिलेक्ट कर लेता हूं। अब अगर मेरी शादी होगी तो सिर्फ और सिर्फ तुम्ही से होगी।”
तभी लिफ्ट का दरवाजा खुला और उसे सामने काफी दूर वाइट कोट पैंट में खड़ी लड़की दिखाई दी। आशीष को नहीं पता था वह कौन है कौन नहीं। उसने सोचना बंद किया और धीरे-धीरे उस लड़की की तरफ अपने कदम बढ़ाएं।
वहां जाते ही उसने अपने दोनों हाथ अपनी पैंट की जेब में डाले और लड़की से पूछा “हु आर यु...”
लड़की ने यह सुना तो अपने चेहरे पर मुस्कान देते हुए कहा “स्नेहा, स्नेहा वर्मा।” और अपना हाथ को मिलने वाले अंदाज में आगे बढ़ा दिया।
स्नेहा तकरीबन आशीष की उम्र से 1 साल कम उम्र की लड़की लग रही थी। शरीर थोड़ा चुस्त-दुरुस्त था। वो आम लड़कियों जैसा नहीं था। यानी वह पतली और कमजोर सी नहीं दिखती थी। गाल गुलाबी थे, मोटे थे। चेहरे पर किसी तरह का भाव ना होने के बावजूद ऐसे लगता था जैसे वह मुस्कुरा रही है।
आशीष ने हाथ मिलाया और हाथ मिलाते हुए कहा “हां मुझे मेरे पिता ने सुबह आपके बारे में बताया था, उन्होंने बताया था कि आप किसी मीटिंग के सिलसिले में मुझसे मिलने आने वाली हैं, आपको अपने कंपनी में कुछ मॉडर्न करना है जिसे लेकर डिस्कस करनी है”
“जी।” दोनों ही सामने कमरे की तरफ जाने लगे। वह आशीष का ऑफिस रुम था। आशीष ने दरवाजा खोला और लड़की को बैठने के लिए जगह दी।
बैठने के बाद वह भी उसके पास वाली कुर्सी पर बैठ गया। स्नेहा सामने से बोली “मेरे पिता ने कि मुझे आपके बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि आपने कुछ ही सालों में काफी सफलता हासिल कर ली है। आप इतने ज्यादा सफल हो चुके हैं कि आपने खुद अपने दम पर एक अलग कंपनी खड़ी कर दी। अगर आज आप अपने पिता से भी अलग हो जाते हैं तो इसके बावजूद आप का शहर में अच्छा-खासा नाम बना रहेगा।”
“जी आपने बिल्कुल सही सुना। मगर मैं पिता से अलग होने वाली बात से सहमत नहीं हूं। मेरे पिता ने मेरे लिए सब कुछ किया है तो मैं कभी भी उससे अलग नहीं होने वाला।”
“मैंने तो बस बात की है।” स्नेहा ने बिना किसी एक्सप्रेशन के कहा।
“जी मैं समझ सकता हूं।” आशीष ने कहा और फोन मिलाते हुए कोल्ड ड्रिंक कमरे में भेजने के लिए कहा।
जल्द ही कोल्ड ड्रिंक कमरे में आ गई और उसे सामने टेबल पर रख दिया गया। आशीष ने स्नेहा को कोल्ड ड्रिंक उठाने के लिए कहा, स्नेहा के कोल्ड ड्रिंक उठाने के बाद आशीष ने भी कोल्ड ड्रिंक उठा ली।
स्नेहा ने कोल्ड ड्रिंक पीते हुए आशीष से पूछा “तो क्या आपके पिता ने मेरे बारे में कुछ और भी कहा था या उनकी बात सिर्फ बिज़नेस तक थी।”
आशीष ने एक हल्की सांस ली और स्नेहा की तरफ देखते हुए कहा “फिलहाल तो उन्होंने अपनी बात सिर्फ बिजनेस तक रखी थी। इसके अलावा वह किसी भी और चीज के बारे में नहीं बोले।” आशीष ने कोल्ड ड्रिंक का एक गुट भरा “और आपके पिता ने...”
“उन्होंने भी अपनी बातें सिर्फ बिजनेस तक रखी। हां मगर यह जरूर कहा कि आपके साथ मिलकर बिजनेस को नई बुलंदियों तक पहुंचाया जा सकता है।”
“यह तो भविष्य ही बताएगा।” आशीष ने अपना गिलास टेबल पर रख दिया “क्योंकि भविष्य में क्या होगा क्या नहीं यह कोई नहीं जानता। भविष्य कब किस तरफ करवट बदलेगा यह हमेशा किसी कहानी के सस्पेंस की तरह सस्पेंस रहता है।”
“हम आपकी बात से इत्तेफाक रखते हैं।” स्नेहा ने दिलचस्प मुस्कान दिखाई “आपकी और हमारी बातें लगभग एक जैसी है। अभी तो यही कहूंगी की भविष्य अच्छे से निकले। बाकी जो होगा देखा जाएगा।” स्नेहा अपनी जगह से खड़ी हो गई।
स्नेहा खड़ी हुई तो आशीष ने पूछा “आप तो यहां मीटिंग के लिए आई थी...”
“हां मगर अब मेरा मन बदल गया है। मीटिंग के लिए आपको इंतजार करना होगा।” स्नेहा ने एक बिजनेसमैन वाली लड़की की तरह जवाब दिया था। एटीट्यूड और ईगो के साथ।
उसका यह जवाब सुनते ही आशीष ने भी रिस्पेक्ट वाला अंदाज छोड़ा और अपने एटीट्यूड में आते हुए कहा “हमें इंतजार करने का शौक नहीं है, आप जाना चाहे तो जा सकती हैं। मगर आज मीटिंग नहीं हुई तो वह भविष्य में भी कभी नहीं होगी।”
“हमें कोई आपत्ति नहीं, इससे नुकसान आपको ही होगा।”
“हो सकता है, मगर नुकसान की परवाह कर कौन रहा है।” आशीष ने अपने दोनों हाथ दरवाजे की तरफ कर दिए “आप इज्जत से जा सकती हैं”
स्नेहा ने आशीष को नजरअंदाज किया और वही दरवाजे से चली गई। उसके जाने के बाद आशीष अपने मन में बोला “एक बिजनेसमैन तभी डूबता है जब उसका इगो उसके बिजनेस के बीच में आ जाए। मुझे नहीं लगता यह लड़की ज्यादा देर तक बिजनेस में टिक पाएगी। इस तरह की लड़कियां मुंह के बल ही गिरती हैं।”
इसके बाद आशीष ने सोचना छोड़ा और अपनी आलीशान कुर्सी पर जाकर बैठ गया। आलीशान कुर्सी पर बैठने के बाद उसने वापस मानवी का सीवी निकाली और मानवी की फोटो को जूम कर उसकी तरफ देखने लगा। मानवी की फोटो देखते हुए उसने कहा “मानवी तुम्हें क्या लगता है अब मुझे आगे क्या करना चाहिए। क्या मैं तुम्हें फोन करके यह कह दूं कि तुम पास हो गई हो। मगर मैंने सुबह तो कहा था कि मुझे मैरिज लड़कियां नहीं चाहिए, फिर तुम सवाल करोगी कि अब ऐसा क्या होगा जो मैं पास हो गई। मैं सीधे-सीधे तो कह नहीं सकता कि मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूं, तो मुझे कोई बहाना सोचना पड़ेगा।” उसने सीवी निकाली और उसे देखने लगा “तुम इतनी टैलेंटेड तो नहीं हो कि तुम्हें नौकरी पर रखा जा सके। तुम्हारे पास कोई खास एक्सपीरियंस भी नहीं जो मुझे इतना बड़ा पद ऑफर देने के लिए मजबूर करें। मगर जब मैं तुम्हारे लिए एक बिल्डिंग को खरीद सकता हूं, तो पद ऑफर करने में क्या जाता है।”
उसने मानवी का नंबर देखा और उस पर फोन मिलाया। दो बेल के बाद ही मानवी ने सामने से फोन उठाया और कहा “जी कहीए मानवी बात कर रही हूं।”
आशीष ने मानवी की आवाज सुनी तो बस सुनता ही रह गया।“मैं बोल रहा हूं मानवी।” कुछ देर ठहरने के बाद उसने कहा। “आशीष, आशीष एंड कंपनी का ऑनर।”
“ओह, हेलो सर, कैसे हैं आप?” मानवी ने सुना तो वो रिस्पेक्ट देने वाले अंदाज में बोली।
“मैं बढ़िया हूं आप बताएं...”
“जी मैं भी अच्छी हूं।”
आशीष ने यह सुना तो अपने मन में कहा “अच्छी, नहीं तुम बहुत अच्छी हो, इसीलिए तो मुझे पसंद आ गई, इतनी ज्यादा कि मैंने आज तुम्हारे लिए वो बिल्डिंग भी खरीद ली जहां तुम रहती हो।”
आशीष ने कोई जवाब नहीं दिया तो मानवी सामने से बोली “अच्छा सर क्या मैं जान सकती हूं आपने किस लिए फोन किया...”
“दरअसल मुझे तुम्हें एक खुशखबरी देनी थी।” आशीष बोला “तुम्हारे जाने के बाद मैंने तुम्हारी सीवी दुबारा देखी, सीवी देखी तो पता चला तुममें शादीशुदा होने के बावजूद काफी सारा टैलेंटे है। तुम ही हो वो... जिसकी मुझे जरूरत है।”
“जी”
“मेरी कंपनी को जरूरत है। तुम बिल्कुल एक सही चोईस हो। मैं कहना चाहता हुं कि तुम्हें जॉब के लिए सिलेक्ट कर लिया गया है। तुम कल से ही काम पर आ सकती हो। फैशन डिजाइनर में तुम्हें सबसे हाईएस्ट पोस्ट पर पोस्ट किया जाता है। 60,000 सैलरी, कंपनी की तरफ से एक लग्जरी कार, और रहने के लिए एक फाईव स्टोर फैकेल्टी फ्लेट”
मानवी ने जैसे-जैसे यह सुना वह खामोश पड़ती गई। जबकि आशीष मन में बोला “तुम्हारा पति जिस पब्लिकेशन हाउस में काम करता है वहां के ऑनर की कमाई भी 50 से 55 हजार प्रति महीना होगी। इस हिसाब से तुम्हारा पति 20,000 से ज्यादा नहीं कमाता होगा। मेरे लक्ष्य और मकसद को हासिल करने का मेरा यह पहला कदम है, पहला कदम जिसके बाद तुम्हारे पति को लगेगा कि वह तुम्हारे सामने काफी छोटा पड़ गया है। मानवी, भाई साहब को कह दे कि अब मुझसे झटके खाने के लिए तैयार रहें। क्योंकि यह तो बस शुरुआत है, आगे-आगे देखना होता है क्या.... द गेम इज बिगेन... और इसमें मजा आएगा।”
★★★